Friday, February 11, 2011

ek gazal

रोटियों से यहाँ भली गोली
इसलिये है नहीं टली गोली

ग़ज़ब कि आप को लगी कैसे
ये हवाओं में थी चली गोली

अमन औ चैन बरक़रार रहा
आप को किसलिये खली गोली

आजकल वादियों में गूंजे है
बूट, खाली गली , गोली

आपका हक बड़ा जो हक में है
सिर्फ बन्दूक क़ी नली गोली

गंध बारूद क़ी है सांसों में
इस क़दर मांस में ढली गोली

7 comments:

राकेश कौशिक said...

"गंध बारूद क़ी है सांसों में
इस क़दर मांस में ढली गोली"

हालातों का गूढ़ चित्रण - साधुवाद

ZEAL said...

Mind blowing creation !

पंख said...

bohot hi sundar rachna... khas taur par antim 2 panktiya :)

स्वप्निल कुमार 'आतिश' said...

ग़ज़ब कि आप को लगी कैसे
ये हवाओं में थी चली गोली

adbhut hai ...behad accha laga ye sher...

आजकल वादियों में गूंजे है
बूट, खाली गली , गोली

arrreeeeee hatss oaff ashwani sir

गंध बारूद क़ी है सांसों में
इस क़दर मांस में ढली गोली

ye sher bhi khub acchaa lga ..

bahut alag kism kee ghazal

समय said...

शुक्रिया।

क्रिएटिव मंच-Creative Manch said...

badhiya rachna


aabhaar

Patali-The-Village said...

बहुत सुन्दर अभिब्यक्ति| धन्यवाद|